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हवन से भगा रहे हैं चमकी बुखार, बच्चों की मौत पर पाखंडियों का नंगा नाच

अगर  हवन पूजन से कुछ होना था, तो पहले ही कर देते. हद है, जब बुखार फैल गया तब कर रहे हो. सीधे ही ईश्वर को फोन क्यों नहीं लगा देते, हे ईश्वर! चमकी बुखार को वापस ले ले, इसे यहां भेजने की क्या जरूरत थी. मुजफ्फरपुर में पुजारियों के एक समूह ने चमकी बुखार के बढ़ते प्रकोप को रोकने के लिए हवन किया.  
दोस्तों विज्ञान में बहुत विकास कर लिया है, परंतु धार्मिक पाखंड मनुष्य का आज भी पीछा नहीं छोड़ रहा है. पाखंडी इसका फायदा उठाकर जनता को मूर्ख बनाते हैं और समाज में अज्ञानता का विकास करते हैं. शायद इसी ईश्वरवाद के वशीभूत होकर लोग सरकार से सवाल नहीं पूछते. आखिर सरकार ने बुखार फैलने के बाद और पहले क्या किया, जिससे कि बच्चों की जान बच सकें.
दोस्तों सच्चाई यह है कि 100 साल पहले भी तरह-तरह की महामारियां फैलती थीं. जिसमें लाखों लोग मारे जाते थे. इन महामारियो की रोक के लिए इंग्लैंड के एक डॉक्टर, डा. एडवर्ड जेनर ने टीके की खोज की. उन्होंने यह टीका चेचक के लिए बनाया था. भारत में पहले लोग चेचक को भी ईश्वरीय प्रकोप मानते थे. कम चेचक होने पर उसे छोटी माता कहते थे, बड़ा चेचक होने पर उसे बड़ी माता कहते थे. परंतु आज चिकित्सा के विकास के बाद हम समझ गए हैं कि यह कोई ईश्वरीय प्रकोप, छोटी माता या बड़ी माता नहीं थी. यह एक बीमारी थी जो वायरस के कारण फैलती थी. 
जबसे डॉक्टर एडवर्ड जेनर चेचक का टीका खोजा, तब से इस महामारी पर नियंत्रण पा लिया गया. आज कहीं भी बड़ी मात्रा में चेचक नहीं फैलता, क्योंकि इसका टीका हमें बचपन में ही दे दिया जाता है.
कमोबेश यही कहानी बिहार की है, जहां अशिक्षा गरीबी बहुत ज्यादा है. चिकित्सा व्यवस्था बहुत खराब है. जिसके कारण लोग ईश्वरवादी हो जाते हैं, अपनी बीमारी को ईश्वरीय प्रकोप मान लेते हैं. इसी का फायदा उठाकर पंडा पुरोहित यज्ञ हवन करते हैं, लोगों का धन अपनी जेब में कर लेते हैं.
आज तक ईश्वर का और इस बात का कि यज्ञ से, चमकी बुखार का प्रकोप कम होगा कोई प्रमाण नहीं मिला है. यह सिर्फ अंधविश्वास है और हमें इससे दूर रहना चाहिए.
एक बात याद रखिए हमारी समस्याओं का समाधान विज्ञान ने किया है और आगे भी विज्ञान करेगा, न कि ब्राह्मण पंडा पुरोहित करेंगे.
-संतोष शाक्य
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