इंदिरा गांधी ने कराई थी बाबू जगदेव प्रसाद कुशवाहा की हत्या

कांग्रेस, ब्राह्मणवाद और मनुवाद की जड़े हिला देने वाले महान क्रांतिकारी जगदेव प्रसाद कुशवाहा, जिन्हें भारत का लेनिन कहा जाता है, की हत्या पुलिस ने कांग्रेस की तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के इशारे पर कर दी थी.
बाबू जगदेव कुशवाहा का जन्म बिहार के एक मौर्यवंशी परिवार में हुआ था. सम्राट अशोक महान के वंशज होने के कारण उनके खून में वही उबाल था और वही क्रांति ज्वाला.
जन्म
बाबू जगदेव प्रसाद कुशवाहा का जन्म भगवान बुद्ध की तपोस्थली बोधगया के निकट कुर्था प्रखंड के कुरहारी ग्राम में 2 फरवरी 1922 को हुआ था. उनके पिता का नाम प्रयाग नारायण कुशवाहा और माता का नाम राजकली देवी कुशवाहा था. 
शिक्षा
गांव से ही आठवीं पास करने के बाद हाई स्कूल की पढ़ाई के लिए वे जहानाबाद चले गए. उसके बाद पटना यूनिवर्सिटी से स्नातक की पढ़ाई पूरी की एवं 1950 में अर्थशास्त्र में परास्नातक किया. एक कोइरी किसान परिवार के लिए यह बहुत बड़ी उपलब्धि थी, क्योंकि शिक्षा उस समय केवल उच्च वर्ग के लोग ही ले पाते थे.
पत्रकारिता
सोशलिस्ट पार्टी में जुड़ने के बाद उन्होंने सोशलिस्ट पार्टी की जनता पत्रिका का संपादन किया. कुछ समय तक हैदराबाद में रहे और वहां अंग्रेजी अखबार सिटीजन का संपादन किया एवं हिंदी अखबार उदय का भी संपादन किया. परंतु अखबार के मालिकों से वैचारिक मतभेद होने के कारण दोनों से इस्तीफा दे दिया और इसके बाद पूर्णकालिक राजनीति में आ गए.
राजनीति
1967 में संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी से चुनाव लड़ा और भारी मतों से जीत दर्ज की. उनकी सूझबूझ और क्रांतिकारी विचारों के कारण बिहार में पहली बार गैर कांग्रेसी सरकार बनी. इस सरकार के बनने में उनका सर्वाधिक सहयोग कर्पूरी ठाकुर ने किया. परंतु कुछ वैचारिक मतभेद होने के कारण 1967 में ही संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी से इस्तीफा दे दिया.
25 अगस्त 1967 को शोषित दल की स्थापना की. पार्टी स्थापित करते समय एक क्रांतिकारी भाषण दिया जिसमें उन्होंने कहा कि, "जिस लड़ाई की बुनियाद अभी में डाल रहा हूं वह लंबी और कठिन होगी क्योंकि मैं एक क्रांतिकारी पार्टी का निर्माण कर रहा हूं इसलिए इसमें आने जाने वाले लोगों की कमी नहीं रहेगी परंतु इसकी धारा कभी रुकेगी नहीं"
इसमें पहली पीढ़ी के लोग मारे जाएंगे 
दूसरी पीढ़ी के लोग जेल जाएंगे 
और तीसरी पीढ़ी के लोग राज करेंगे 
जीत अंतोगत्वा हमारी होगी.
1 जून 1968 को महामना रामस्वरूप वर्मा के साथ मिलकर अर्जक संघ की स्थापना की. जिसका आधार तथागत गौतम बुद्ध और महात्मा ज्योतिबा राव फूले छत्रपति शाहूजी महाराज और बाबा साहब भीमराव अंबेडकर के विचारों पर रखा गया था.
इसके उपरांत 7 अगस्त 1972 को जगदेव प्रसाद कुशवाहा का शोषित दल और रामस्वरूप वर्मा का समाज दल एक हो गए और दोनों ने मिलकर पार्टी का नाम "शोषित समाज दल" रखा. महामना रामस्वरूप वर्मा इसके अध्यक्ष बने और महा मना जगदेव प्रसाद कुशवाहा इसके महासचिव हुए.
इसके बाद उन्होंने देश के तूफानी दौरे शुरू कर दिए, उस समय जेपी आंदोलन चरम पर था परंतु जेपी आंदोलन से कुछ मतभेद होने के कारण उन्होंने अपना आंदोलन अलग चलाया, और काग्रेस सरकार की जड़े ही हिला कर रख दी. उन्होंने 90 परसेंट शोषित समाज पर 10% सवर्ण समाज का राज चलने की बात से इंकार कर दिया और नारा दिया.
10 का शासन 90 पर 
नहीं चलेगा नहीं चलेगा 
धन धरती और राजपाट में 
90 भाग हमारा है 
10 का शासन 90 पर 
नहीं चलेगा नहीं चलेगा
इन्हीं मांगों को लेकर वे लगातार रैलियां कर रहे थे. बाबू जगदेव 5 सितंबर 1974 को एक बहुत बड़ी जनसभा को संबोधित कर रहे थे तभी कांग्रेस सरकार ने पूर्व नियोजित तरीके से उनकी हत्या करा दी.  जब भी जनसभा को संबोधित कर रहे थे तो पुलिस ने आकर सीधे उनको गोली मार दी जिसमें वह घायल हो गए.
इसके बाद उन्हें पुलिस स्टेशन तक जीप के पीछे बांध कर ले जाया गया. कहा जाता है कि जब उन्हें प्यास लगी तो पानी मांगने पर उनके मुंह में पेशाब भी कर दिया गया. इस तरह पिछड़े दलितों और शोषित के मसीहा का अंत हो गया. 5 सितंबर 1974 को आज भी शहीद जगदेव प्रसाद कुशवाहा का शहीदी दिवस मनाया जाता है और संपूर्ण शोषित समाज उनके प्रति श्रद्धा से नमन करता है.
5 सितंबर को सरकार ने उनकी हत्या जरूर करा दी पर, यह उनके विचारों की शुरुआत थी, आज उनके विचार और भी तेजी से फैल रहे हैं.
द फाइंडर उनके जन्मदिवस पर उन्हें नमन करता है.
- ब्यूरो रिपोर्ट द फाइंडर

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